फरवरी माह में किसानों को क्या क्या करना चाहिए काम, देखें खेती, पशु और फसल बिक्री संबंधित पूरी जानकारी

Published On: February 15, 2026
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महत्वपूर्ण सुझाव: सिंचाई: स्प्रिंकलर या फव्वारा तकनीक का उपयोग करके कम पानी में सिंचाई करें। मिट्टी की उर्वरता: नव्यकोष आर्गेनिक खाद का उपयोग करें। मौसम की निगरानी: तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण फसलों में नमी और रोग पर विशेष नजर रखें।

फरवरी का महीना हरियाणा के किसानों के लिए ‘बदलाव का महीना’ है। इस समय सर्दी की विदाई और गर्मी की आहट फसलों पर सीधा असर डालती है। फरवरी महीना रबी फसलों की देखभाल और जायद (गर्मी) फसलों की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण है। इस माह में गेहूं में सिंचाई, गन्ने की बुवाई, भिंडी, लौकी व सूरजमुखी जैसी नकदी सब्जियों की रोपाई, और आम के पेड़ों में मौसमी रोगों से बचाव के उपाय करें। पशुओं को बदलते मौसम (गर्मी की शुरुआत) में उचित खान-पान और रोगमुक्त माहौल प्रदान करें। 

फरवरी माह में प्रमुख कृषि कार्य:

  • गेहूं की देखभाल: फरवरी में तापमान बढ़ता है, इसलिए भारी सिंचाई से बचें। रतुआ (Rust) रोग के लक्षण मिलने पर टब्यूकोनाज़ोल (Tebuconazole) का छिड़काव करें। गेहूं में फूल आने या दूधिया अवस्था में हल्की सिंचाई करें।
  • बसंतकालीन गन्ने की बुवाई: 15 फरवरी के बाद बसंत गन्ने की बुवाई शुरू करें। उन्नत और रोगमुक्त बीजों का प्रयोग करें।
  • सब्जियों की बुवाई/रोपाई: भिंडी, लौकी, कद्दू, करेला, खीरा, तरबूज और खरबूज की जायद फसलों के लिए बुवाई का सर्वोत्तम समय है।
  • अन्य फसलें: सूरजमुखी (15 फरवरी तक), बसंतकालीन मक्का, और प्याज की रोपाई की जा सकती है।
  • कीट/रोग नियंत्रण: सरसों में माहू (Aphid) के प्रकोप के लिए डाइमिथोएट 30 ई.सी. का छिड़काव करें। बागों में आम पर बौर आने के समय चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew) रोग की निगरानी करें। 

पशुपालन से संबंधित कार्य:

  • तापमान में बदलाव: अब गर्मी बढ़ रही है, इसलिए पशुओं के रहने की जगह को हवादार बनाएं।
  • स्वास्थ्य देखभाल: पशुओं में टिक्स (Ticks) की समस्या बढ़ने पर उचित कीटनाशक का उपयोग करें।
  • गर्मियों के लिए चारे की तैयारी: बरसीम की कटाई करें और संतुलित दाना मिश्रण दें। 

फसल बिक्री व विपणन:

किसान मंडियों में फसलों का सही समय पर पंजीकरण कराएं और बाजार भाव की जानकारी लेकर ही उपज बेचें। 

जिन किसानों ने पछेती सब्जियां लगाई थीं, वे बाज़ार में जल्दी फसल पहुँचाकर बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं।

यहाँ फरवरी माह के लिए मुख्य कृषि निर्देश दिए गए हैं:

1. गेहूँ की फसल के लिए सुझाव (Wheat Care)

  • तापमान और सिंचाई: तापमान बढ़ने से गेहूँ में नमी की कमी हो सकती है। जब बालियाँ निकल रही हों, तो हल्की सिंचाई अवश्य करें। तेज हवा चलने पर सिंचाई न करें वरना फसल गिर सकती है।
  • पीला रतुआ (Yellow Rust): यदि गेहूँ की पत्तियों पर पीला पाउडर जैसा दिखे, तो तुरंत प्रोपिकोनाजोल (Propiconazole) का छिड़काव करें।
  • पछैती बुवाई: देर से बोई गई फसल में दानों का आकार बढ़ाने के लिए 2% यूरिया या पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव फायदेमंद रहता है। 

2. सरसों की देखभाल (Mustard Management)

  • चेपा कीट (Aphids): इस समय सरसों पर चेपा का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए आवश्यकतानुसार कीटनाशकों का प्रयोग करें।
  • कटाई: जब सरसों की फलियाँ 75-80% तक सुनहरी या पीली हो जाएं, तो कटाई शुरू कर दें। ज्यादा सूखने पर दाने झड़ने का डर रहता है। 

3. गर्मी की फसलों की तैयारी (Summer Crop Sowing)

  • मूंग की बुवाई: फरवरी के अंतिम सप्ताह से ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई शुरू कर दें। यह मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है।
  • गन्ने की बिजाई: गन्ने की बुवाई (Spring Sugarcane) के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है। 

4. बागवानी और सब्जियां (Horticulture)

  • बेल वाली सब्जियां: लौकी, तोरई, करेला और खीरे की बुवाई तुरंत पूरी कर लें।
  • पाले से सुरक्षा: हालांकि पाले का डर अब कम है, लेकिन छोटे पौधों को रात की नमी और सुबह की गर्मी के संतुलन से बचाएं।

5. सरकारी पोर्टल पर अपडेट (Administrative Advice)

  • मेरी फसल-मेरा ब्यौरा: यदि आपने अभी तक अपनी रबी फसलों का पंजीकरण पोर्टल पर नहीं किया है, तो इसे तुरंत पूरा करें ताकि फसल बेचने में दिक्कत न आए।
  • मिट्टी जांच: गर्मी की फसल (जैसे मक्का या कपास) लगाने से पहले खाली खेतों की मिट्टी की जांच (Soil Testing) करवा लें। 

6. पशुपालन (Animal Husbandry) 

  • बदलते मौसम में पशुओं के आहार में मिनरल मिक्सचर बढ़ाएं।
  • दिन में खिड़कियां खोलें ताकि ताजी हवा आए, लेकिन रात को अभी भी पशुओं को ठंडी हवा से बचाकर रखें।

महत्वपूर्ण सुझाव:

  1. सिंचाई: स्प्रिंकलर या फव्वारा तकनीक का उपयोग करके कम पानी में सिंचाई करें।
  2. मिट्टी की उर्वरता: नव्यकोष आर्गेनिक खाद का उपयोग करें।
  3. मौसम की निगरानी: तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण फसलों में नमी और रोग पर विशेष नजर रखें। 

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