February Month Fasal: कृषि के क्षेत्र में हर माह कुछ खास फसलों की बुआई की जाती है और फरवरी का महीना इस काम के लिए एकदम सही है. सर्दी के मौसम में कुछ खास सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं, जो न केवल जल्दी उगती हैं, बल्कि बाजार में अच्छे दाम भी लाती हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपकी खेती से अच्छा मुनाफा मिले, तो फरवरी में इन 5 सब्जियों को जरूर उगाएं. ये सब्जियां कम समय में तैयार होती हैं और जल्दी बिक भी जाती हैं.
1. पालक (Spinach)
पालक एक ऐसी सब्जी है जिसे आसानी से उगाया जा सकता है और सर्दियों में इसकी मांग भी बहुत रहती है. फरवरी में पालक की बुआई करने से अच्छी फसल मिलती है. यह पौधा बहुत जल्दी बढ़ता है और महज 30 से 40 दिनों में तैयार हो जाता है. इसे किसी भी अच्छे उपजाऊ मिट्टी में लगाया जा सकता है, बस यह ध्यान रखना जरूरी है कि मिट्टी में पर्याप्त नमी हो.
पालक में भरपूर पोषक तत्व होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, और इसकी कीमत भी बाजार में बढ़िया मिलती है. इस पौधे की देखभाल भी आसान होती है, जिससे यह किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाता है.
2. मटर (Peas)
फरवरी में मटर की खेती किसानों के लिए काफी लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि यह महीना मटर की फसल के लिए सबसे उपयुक्त समय है. मटर के पौधे ठंडे मौसम में अच्छे से उगते हैं और इनकी खेती में ज्यादा मेहनत नहीं लगती. मटर के लिए हल्की बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है, जिसमें पानी अच्छे से रिस सके. मटर की फसल करीब 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. यह बाजार में अच्छे दाम पर बिकती है, क्योंकि इसकी डिमांड हमेशा रहती है.
3. गोभी (Cabbage)
गोभी एक ऐसी सब्जी है, जिसकी फसल से सर्दियों में बहुत अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है. फरवरी में इसकी बुआई से किसानों को तगड़ा फायदा हो सकता है. गोभी के पौधे ठंडी जलवायु में अच्छे से बढ़ते हैं. इसे गहरी और बलुई मिट्टी में लगाया जाना चाहिए, ताकि जड़ों को फैलने में कोई परेशानी न हो.
गोभी की फसल 2 से 3 महीने में तैयार हो जाती है. इसकी पत्तियों में कई पोषक तत्व होते हैं और इसका बाजार में हमेशा अच्छा मूल्य मिलता है. गोभी की खेती एक निवेश के रूप में बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है.
4. मूली (Radish)
मूली सर्दी के मौसम की एक महत्वपूर्ण और जल्दी उगने वाली फसल है. फरवरी में इसे बोने से अच्छी फसल मिल सकती है. मूली की खेती में आपको ज्यादा देखभाल नहीं करनी होती है और यह कम समय में तैयार हो जाती है. मूली उगाने के लिए अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए और मिट्टी को थोड़ा ढीला रखना चाहिए. यह सब्जी जल्दी बढ़ती है और 30 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है. मूली में फाइबर और विटामिन C जैसे कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं. बाजार में मूली की अच्छी डिमांड होती है, इसलिए इसका उत्पादन किसानों के लिए लाभकारी है.
5. शिमला मिर्च (Capsicum)
किसानों के लिए शिमला मिर्च की खेती भी सर्दियों में बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है. इसे फरवरी में उगाने से अच्छी फसल मिल सकती है. शिमला मिर्च को उगाने के लिए हल्की और जल निकासी वाली मिट्टी की आवश्यकता होती है. इसके पौधों को पर्याप्त धूप और पानी चाहिए. शिमला मिर्च को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसे कीटों और रोगों से बचाने के लिए समय-समय पर उपचार करना जरूरी होता है. शिमला मिर्च की खेती से न केवल अच्छा मुनाफा मिलता है, बल्कि यह किसानों के लिए एक स्थिर आय का स्रोत बन सकती है. इसकी डिमांड पूरे साल रहती है, खासकर सर्दी में.
6. मिर्च (Capsicum)
मिर्च की खेती कम भूमि में भी अच्छी आमदनी देती है। यह समय इस फसल की रोपाई की जा सकती है। बाजार में हरी व लाल दोनों तरह की मिर्ची की अच्छी कीमत मिलती है। ग्रीष्म मिर्च की रोपाई फरवरी-मार्च में करना अच्छा रहता है।
मिर्च की उन्नत किस्म काशी अनमोल, काशी विश्वनाथ, जवाहर मिर्च-283, जवाहर मिर्च -218, अर्का सुफल तथा संकर किस्म काशी अर्ली, काषी सुर्ख या काशी हरिता शामिल हैं जो ज्यादा उपज देती हैं। मिर्च की बुवाई के लिए मिर्च की ओ.पी. किस्मों के 500 ग्राम तथा संकर (हायब्रिड) किस्मों के 200-225 ग्राम बीज की मात्रा एक हेक्टेयर क्षेत्र की नर्सरी तैयार करने के लिए पर्याप्त होती है।
7. भिंडी- बीज की मात्रा रखें ध्यान
भिंडी की खेती वर्ष में दो बार की जा सकती है। ग्रीष्म-कालीन भिंडी की खेती के लिए बुआई का सही समय अभी है। ग्रीष्मकालीन भिंडी की बुआई फरवरी-मार्च में में की जा सकती है। भिंडी की उन्नत किस्मों में पूसा ए-4, परभनी क्रांति, पंजाब-7, अर्का अभय, अर्का अनामिका, वर्षा उपहार, हिसार उन्नत, वी.आर.ओ.- 6 (इस किस्म को काशी प्रगति के नाम से भी जाना जाता है।) भिंडी की बुवाई के लिए सिंचित अवस्था में 2.5 से 3 किलोग्राम तथा असिंचित दशा में 5-7 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर बीज की आवश्यकता होती है। संकर किस्मों के लिए 5 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की बीजदर पर्याप्त होती है।
भिंडी के बीज सीधे खेत में ही बोए जाते हैं। बीज बोने से पहले खेत को तैयार करने के लिये 2-3 बार जुताई करनी चाहिए। ग्रीष्मकालीन भिंडी की बुवाई कतारों में करनी चाहिए। भिंडी की फसल में अच्छा उत्पादन लेने हेतु प्रति हेक्टेर क्षेत्र में लगभग 15-20 टन गोबर की खाद एवं नत्रजन, स्फुर एवं पोटाश की क्रमश: 80 कि.ग्रा., 60 कि.ग्रा. एवं 60 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की दर से मिट्टी में देना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के पूर्व भूमि में देना चाहिए। नत्रजन की शेष मात्रा को दो भागों में 30-40 दिनों के अंतराल पर देना चाहिए।
8. टमाटर- नर्सरी में बुवाई लिए बनाए उठी हुई क्यारियां
टमाटर की खेती भी वर्ष में दो बार किया जाता है। शीत ऋतु के लिए इसकी बुवाई जनवरी-फरवरी माह में की जाती है। इस बात कर ध्यान रखें कि फसल पाले रहित क्षेत्रों में उगाई जानी चाहिए या इसकी पाले से समुचित रक्षा करनी चाहिए। इसके एक हेक्टेयर क्षेत्र में फसल उगाने के लिए नर्सरी तैयार करने के लिए 350 से 400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। संकर किस्मों के लिए बीज की मात्रा 150-200 ग्राम प्रति हेक्टेयर ली जानी चाहिए है।
टमाटर की उन्नत किस्मों में देशी किस्म-पूसा रूबी, पूसा- 120, पूसा शीतल, पूसा गौरव, अर्का सौरभ, अर्का विकास, सोनाली तथा संकर किस्मों में पूसा हाइब्रिड-1, पूसा हाइब्रिड -2, पूसा हाइब्रिड -4, अविनाश-2, रश्मि तथा निजी क्षेत्र से शक्तिमान, रेड गोल्ड, 501, 2535 उत्सव, अविनाश, चमत्कार, यू.एस. 440 आदि है।
नर्सरी में बुवाई हेतु 1 से 3 मी. की ऊठी हुई क्यारियां बनाकर फोर्मेल्डिहाइड द्वारा स्टेरीलाइजशन कर ले अथवा कार्बोफ्यूरान 30 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मिलावें। बीज को कार्बेन्डाजिम/ट्राइकोडर्मा प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित कर 5 से.मी. की दूरी रखते हुए कतारों में बीजों की बुवाई करे। बीज बोने के बाद गोबर की खाद या मिट्टी ढक दे और हजारे से छिडक़ाव बीज उगने के बाद डायथेन एम-45/मेटालाक्सिल छिडकाव 8-10 दिन के अंतराल पर करना चाहिए। 25 से 30 दिन का रोपा खेतो में रोपाई से पूर्व कार्बेन्डिजिम या ट्राईटोडर्मा के घोल में पौधों की जड़ों को 20-25 मिनट उपचारित करने के बाद ही पौधों की रोपाई करें। पौध को उचित खेत में 75 से.मी. की कतार की दूरी रखते हुए 60 से.मी के फासले पर पौधो की रोपाई करे।
9. सूरजमुखी- बीजों को पक्षियों से बचाएं, इस तरह करें बुवाई
सूरजमुखी की फसल नकदी फसलों में से एक है। यह अधिक मुनाफा देने वाली फसलों में शुमार है। सूरजमुखी की फसल 15 फरवरी तक लगाई जा सकती है। इसकी फसल की बुवाई करते समय इसके बीजों की पक्षियों से रक्षा करना बेहद जरूरी है क्योंकि पक्षी बीजों को निकाल कर ले जाते है। इनसे बचाव के लिए ध्वनि करें।
सूरजमुखी की बुवाई के लिए किस्म मार्डन बहुत लोकप्रिय है। इसके अलावा इसकी संकर किस्में भी बोई जा सकती है। इनमें बीएसएस-1, केबीएसएस-1, ज्वालामुखी, एमएसएफएच-19, सूर्या आदि शामिल हैं।
इसकी बुवाई करने से पूर्व खेत में भरपूर नमी न होने पर पलेवा लगाकर जुताई करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद साधारण हल से 2-3 बार जुताई कर के खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिए या रोटावेटर का इस्तेमाल करना चाहिए। इसकी बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी 4-5 सेमी व पौध से पौध की दूरी 25-30 सेमी रखनी चाहिए। बुवाई से पूर्व 7-8 टन प्रति हैक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर खाद भूमि में खेत की तैयारी के समय खेत में मिलाएं व अच्छी उपज के लिए सिंचित अवस्था में यूरिया 130 से 160 किग्रा, एसएसपी 375 किग्रा व पोटाश 66 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। नाइट्रोजन की 2/3 मात्रा व स्फुर व पोटाश की समस्त मात्रा बोते समय प्रयोग करें एवं नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा को बुवाई के 30-35 दिन बाद पहली सिंचाई के समय खड़ी फसल में देना लाभप्रद पाया गया है।
5. पेठा – इन प्रजातियों पर कम होगा कीट व बीमारियों का असर
मेठा दोमट, बलुई और अम्लीय मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है। पेठा कद्दू की खेती के लिए तमाम उन्नत प्रजातियां मौजूद हैं, जो न केवल ज्यादा उत्पादन देने वाली हैं, बल्कि उन पर कीट, बीमारियों व विपरीत मौसम का असर भी कम होता है।
इस की उन्नतशील प्रजातियों में पूसा हाइब्रिड 1, कासी हरित कद्दू, पूसा विश्वास, पूसा विकास, सीएस 14, सीओ 1 व 2, हरका चंदन, नरेंद्र अमृत, अरका सूर्यमुखी, कल्यानपुर पंपकिंग 1, अंबली, पैटी पान, येलो स्टेटनेप, गोल्डेन कस्टर्ड आदि प्रमुख हैं।
एक हेक्टेयर में पेठा कद्दू की खेती के लिए 7 से 8 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। इसके लिए एक 15 हाथ लंबा लकड़ी का डंडा लें जिसकी सहायता से सीधी लाइन में पेठा के बीज की बुवाई करें। एक हाथ की दूरी में पेठा के 3 से 4 बीज बोए जाते हैं।
कैसे करें इन सब्जियों की खेती?
इन सब्जियों की खेती के लिए आपको कुछ सामान्य बातें ध्यान में रखनी चाहिए…
- मिट्टी का चयन: मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए गोबर की खाद डालें और अच्छे जल निकासी वाली मिट्टी का उपयोग करें.
- सिंचाई: इन फसलों को पानी की जरूरत होती है, लेकिन अधिक पानी से बचने के लिए मिट्टी को हल्का गीला रखें.
- निषेचन: समय-समय पर उचित उर्वरक का प्रयोग करें ताकि पौधों की वृद्धि तेज हो.
- कीट नियंत्रण: कीटों और रोगों से बचाने के लिए जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल करें.







