फरवरी माह के अंत तक बुवाई करना “अगेती खेती” (Early Farming) के अंतर्गत आता है, जो गर्मियों में फसल को समय से पहले बाजार में लाकर किसानों को मोटा मुनाफा दिलाने में मदद करता है।
फरवरी के अंत तक बोई जाने वाली मुख्य सब्जियां, उनकी प्रक्रिया और संभावित मुनाफे का विवरण नीचे दिया गया है:
1. भिंडी (Okra)
- प्रक्रिया: बीज को बोने से पहले 24 घंटे पानी में भिगो दें ताकि अंकुरण अच्छा हो। कतार से कतार की दूरी 1 फीट और पौधे से पौधे की दूरी 6 इंच रखें। राधिका (Advanta) या शताब्दी जैसी उन्नत किस्मों का चुनाव करें।
- लागत: लगभग ₹20,000 – ₹25,000 प्रति एकड़।
- मुनाफा: अगेती भिंडी बाजार में ₹40-50/किलो तक बिक सकती है, जिससे ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख प्रति एकड़ तक की कमाई संभव है।
2. लौकी (Bottle Gourd)
- प्रक्रिया: इसे सीधे गड्ढों में बोया जा सकता है। मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। बेहतर फल के लिए मचान (Trellis) विधि अपनाएं। पंजाब कोमल या अर्का बहार अच्छी किस्में हैं।
- लागत: लगभग ₹25,000 – ₹35,000 प्रति एकड़।
- मुनाफा: अच्छी देखभाल से 150-160 क्विंटल पैदावार मिल सकती है, जिससे ₹1.2 लाख से ₹1.5 लाख प्रति एकड़ तक का शुद्ध लाभ हो सकता है।
3. खीरा और ककड़ी (Cucumber)
- प्रक्रिया: इसे मेड़ों (Ridges) पर लगाना सबसे अच्छा रहता है। खेत की 2-3 बार गहरी जुताई करें। बीजों के बीच 2 फीट की दूरी रखें।
- लागत: ₹15,000 – ₹20,000 प्रति एकड़।
- मुनाफा: गर्मी की शुरुआत में इनकी भारी मांग रहती है, जिससे प्रति एकड़ ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक का मुनाफा कमाया जा सकता है।
4. करेला (Bitter Gourd)
- प्रक्रिया: बीज के कठोर आवरण के कारण इसे बोने से पहले उपचारित करना जरूरी है। इसे भी मचान विधि से उगाने पर फल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बेहतर मिलते हैं।
- लागत: ₹25,000 – ₹30,000 प्रति एकड़।
- मुनाफा: यह एक लंबी चलने वाली फसल है और अच्छी मंडी दर मिलने पर ₹1.5 लाख से ऊपर का लाभ दे सकती है।
5. टमाटर, मिर्च और बैंगन (Transplanting)
- प्रक्रिया: यदि नर्सरी तैयार है, तो फरवरी अंत तक इनकी रोपाई (Transplanting) कर दें। यदि नहीं, तो अभी बीज डालकर मार्च के अंत तक पौध तैयार की जा सकती है।
- मुनाफा: टमाटर जैसी फसलें “एटीएम” की तरह काम करती हैं, जो कम समय में ₹2 लाख से ₹4 लाख तक का रिटर्न दे सकती हैं।
बुवाई के समय महत्वपूर्ण सुझाव:
- मिट्टी की तैयारी: खेत की जुताई के समय प्रति एकड़ 10-15 टन गोबर की खाद जरूर डालें।
- बीज उपचार: फफूंद जनित रोगों से बचने के लिए बीजों को थिरम या कार्बेंडाजिम से उपचारित करें।
- सिंचाई: बढ़ते तापमान को देखते हुए 7-10 दिनों के अंतराल पर हल्की सिंचाई की व्यवस्था रखें।







