Tips Save Crops from Termites: दीमक एक ऐसा कीट है जो फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। यह फसलों की जडों से लेकर तनों और खेत में बचे अवशेषों को भारी नुकसान पहुंचाता है। गर्मी और सूखे के मौसम में दीमक का प्रकोप सबसे अधिक होता है। यदि वक्त रहते इसके प्रकोप ना रोका जाये तो फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है।
खेतों में अधिक सूखापन होने से फैलता है दीमक
खेतों में ज्यादा सूखापन होने की वजह से दीमक तेजी से फैलता है। वहीं कच्चा गोबर का खाद डालने से भी फसलों में दीमक लग जाता है। फसलों की कटाई के बाद कई किसान फसलों के अवशेष को खेतों में ही छोड़ देते हैं जिसके कारण दीमक पनपने लगते हैं। मिट्टी में जैविक पदार्थों का असंतुलन इसके पनपने का सबसे बड़ा कारण बन जाता है।
खेतों की गहरी जुताई फायदेमंद
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में खेतों की गहरी जुताई करना फायदेमंद होता है। गहरी जुताई करने से मिट्टी में मौजूद दीमक के अंडे और कॉलोनियां नष्ट हो जाती हैं। तेज धूप के संपर्क में आने से कीटों की संख्या कम होती है और अगली फसल सुरक्षित रहती है।
समय-समय पर सिंचाई जरूरी
सूखी मिट्टी में दीमक जल्दी फैलता है। इसलिए खेतों में समय-समय सिंचाई होनी जरूरी है। साथ ही मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें। इससे दीमक के प्रकोप को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद का इस्तेमाल
कच्चे गोबर के खाद में दीमक फैलता है इसलिए हमेशा अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर खाद का ही खेतों में इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं फसल कटाई के बाद खेत में बचे डंठल, पत्तियां और अन्य अवशेष दीमक के लिए भोजन का काम करते हैं। ऐसे में कटाई के बाद खेत की अच्छी तरह सफाई करें और अवशेषों को हटा दें।
नीम खली का इस्तेमाल फायदेमंद
खेतों में बुवाई के समय नीम खली का इस्तेमाल करना दीमक नियंत्रण का एक प्रभावी उपाय माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक प्रति एकड़ 100 से 150 किलोग्राम नीम खली का उपयोग किया जा सकता है। यह प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण में मदद करती है।
रसायनिक दवाओं का इस्तेमाल
दीमक का प्रकोप बहुत अधिक बढ़ गया है तो कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना सलाह के किसी भी रसायन का उपयोग करने से नुकसान हो सकता है।








