अल नीनो की चेतावनी, भारत में हीटवेव और सूखे का बढ़ा खतरा

Published On: May 6, 2026
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El Nino: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सहित एशिया के कई देशों पर अल नीनो का खतरा मड़रा रहा है। अगर अल नीनो एक्टिव होता है तो इसका साफ मतलब है कि तेल-गैस जैसी ऊर्जा की मांग का बढ़ेगी, बिजली पर दबाव पड़ेगा और फसलों का नुकसान होगा। अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जिसमें जलवायु पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है। हवा की गति, हवा के दबाव और बारिश के पैटर्न पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

बीते हफ्ते ही संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने जानकारी दी कि विश्व में मई से लेकर जुलाई तक अल नीनो की स्थिति बनते दिख रही है।  WMO (वर्ल्ड मेटरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन) ने भी जानकारी दी है कि शुरुआती संकेत बताते हैं कि अल नीनो का असर मजबूत होगा। कुछ परिस्थितियों में यह सुपर अल नीनो भी हो सकता है।

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अल-नीनो का असर भारत सहित एशिया के कई देशों पर पड़ेगा। इससे हीटवेव, सूखा या फिर भारी बारिश की खतरा भी बढ़ सकता है। दरअसल, अल-नीनो की स्थिति बनने के बाद मौसम के परंपरागत पैटर्न में बदलाव होता है जिससे सामान्य बारिश नहीं होती। यहां तक कि जहां बारिश नहीं चाहिए वहां होती है। हर 2 से 7 सालों में एक बार अल-नीनो की स्थिति बनती है।

1997 में अल नीनो के विनाशकारी प्रभाव

वैज्ञानिक पीटर वैन रेंच ने बताया कि  ये भी संभव है कि अल नीनो बिल्कुल एक्टिव ना हो। 1997 के दौरान अल नीनो के विनाशकारी प्रभाव हुए थे, जिनमें इंडोनेशिया में भीषण सूखा और विनाशकारी जंगल की आग शामिल थी, जिसने लाखों हेक्टेयर जमीन को जलाकर राख कर दिया और वायु प्रदूषण पैदा किया।

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अल नीनो का यह संभावित खतरा ऐसे समय में सामने है जब पश्चिम एशिया के तनाव ने तेलों की सप्लाई को जोखिम में डाल रखा है। पश्चिम एशिया के तनाव से खाद का संकट देशों के सामने है। होर्मुज स्ट्रेट से कृषि जरूरतों के कई सामान पार होते हैं जिनकी सप्लाई खतरे में पड़ी है।

खेती-बाड़ी पर पड़ेगा असर

ऐसे समय में अगर अल नीनो एक्टिव होता है तो इसका सीधा असर खेती-बाड़ी पर पड़ेगा। ऊर्जा की जरूरतें बढ़ेंगी जबकि उसकी मांग पूरा करने के लिए तेल और गैस की सप्लाई कम रहेगी। एक ओर गर्मी बढ़ेगी तो दूसरी ओर उसे ठंडा करने के साधनों की कमी रहेगी।

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ज्यादा गर्मी और सूखा पड़ने से खेती-बाड़ी के लिए नए खतरे पैदा होंगे। खेती पहले से ही दबाव में है, क्योंकि ईरान की लड़ाई की वजह से खेती में इस्तेमाल होने वाली जरूरी खाद और ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं।

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