Mulching Method: इन दिनों मौसम का मिजाज हमेशा बदलता रहता है कभी तेज धूप, कभी बारिश तो कभी गर्मी। ऐसे मौसम ने खेती को अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में फसलों को संभालना किसानों के लिए बहुत मुश्किल होता है। ऐसे बदलते मौसम में किसानों के लिए एक तकनीक जो सहारा बन चुकी है वो है मल्चिंग विधि। इस तकनीक से फसलों की सुरक्षा तो होती ही है साथ में कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन भी होता है। यह एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसमें मिट्टी की देखभाल से लेकर फसल की सुरक्षा तक कई काम एक साथ होते हैं।
जानते हैं क्या होती है मल्चिंग विधि
मल्चिंग विधि बहुत ही आकर्षक और उपयोगी तकनीक है। इस तकनीक में फसल की आसपास की मिट्टी को ढक दिया जाता है। मिट्टी को ढकने के लिए किसान प्लास्टिक शीट, सूखी घास, पत्तियां, भूसा या फसल के अवशेषों का इस्तेमाल करते हैं। इसका उद्देश्य मिट्टी की नमी को लंबे वक्त तक बनाए रखना है ताकि पौधों को पानी की कमी ना हो।
इसके अलावा इस विधि को अपनाने से खेत में खरपतवार यानी अनचाहे पौधे कम उगते हैं, जिससे फसल को पूरा पोषण मिल पाता है। वही मल्चिंग करने से पौधों की जड़ों को धूप, गर्मी और ठंड के असर से भी सुरक्षा मिलती है। इससे फसल की बढ़त अच्छी होती है और उत्पादन भी बेहतर होता है।
किसानों के लिए मल्चिंग विधि क्यों बनी वरदान
मल्चिंग विधि से पौधों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है जिससे पौधों को बार-बार पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है और पानी की बचत होती है। टमाटर, शिमला मिर्च और स्ट्रॉबेरी जैसी हाई वैल्यू फसलों की खेती में मल्चिंग बहुत फायदेमंद और कारगर तकनीक मानी जाती है।
मल्चिंग विधि दो प्रकार से की जाती है पहली जैविक और दूसरी अजैविक। जैविक मल्चिंग में सूखी पत्तियां, भूसा या घास का इस्तेमाल होता है, जो बाद में सड़कर खाद बन जाती हैं। जबकि अजैविक मल्चिंग में प्लास्टिक या पॉलीथीन शीट का उपयोग किया जाता है, जो ज्यादा समय तक चलती है और प्रभावी मानी जाती है।
मल्चिंग करने का क्या है सही तरीका
मल्चिंग विधि अपनाने से पहले खेत में ड्रिप सिंचाई पाइप बिछाए जाते हैं। इसके बाद फिर मिट्टी के ऊपर मल्चिंग शीट या जैविक पदार्थ बिछा दिए जाते हैं। जहां-जहां पौधे लगाने होते हैं, वहां छोटे छेद कर पौधों को लगाया जाता है। शीट को अच्छी तरह से मिट्टी से ढ़क दे ताकि वो लंबे वक्त तक रहे।








