Sarpagandha Farming Tips: सर्पगंधा की खेती इन दिनों किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही है। यह एक औषधीय पौधा होने के साथ-साथ बहुत मुनाफा भी देता है। इसकी खेती में मेहनत कम लगती है साथ ही साथ बड़ी बात यह है कि इसको कम पानी की ही जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि किसान इसे कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाली फसल मनाते हैं।
सर्पगंधा (Rauvolfia serpentina) क्या है
सर्पगंधा का पौधा एक औषधीय पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम Rauvolfia serpentina है। इसकी जड़ों से कई तरह की दवाइयों का निर्माण होता है। इसका मुख्य रूप से इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशन (BP), तनाव और चिंता, अनिद्रा और मानसिक कमजोरी जैसी समस्याओं के निवारण वाली दवाओं के लिए किया जाता है। दवा कंपनियों में इस पौधे की बहुत ज्यादा मांग है। यही वजह है कि सर्पगंधा की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होती है।
कैसे करें खेती
सर्पगंधा की खेती करने के लिए मिट्टी का चुनाव बहुत जरूरी होता है। इसके लिए हल्की या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है। वहीं रेतीली दोमट मिट्टी भी ठीक रहती है। खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही मिट्टी का pH लगभग 6 से 7.5 के बीच हो तो बेहतर उत्पादन मिलता है।
इसके बीज को 24 घंटे पानी में भिगोकर बोया जाता है। ध्यान रखने वाली बात जून-जुलाई में नर्सरी तैयार की जाती है और 45 से 60 दिनों में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। वहीं दूसरा तरीका पौधों की रोपाई है। इसमें एक हेक्टेयर में लगभग 40,000 से 50,000 पौधे लगाए जाते हैं। पौधों के बीच 45 से 60 सेमी की दूरी रखी जाती है।
1.5 से 2 साल में फसल तैयार
सर्पगंधा की फसल को तैयार होने में 1.5 से 2 सालों का समय लगता है। पौधे की जड़े मोटी और मजबूत हो जाये तो समझो ये तैयार हो चुकी है। इसके पौधे को जड़ सहित उखाड़ा जाता है फिर पानी में धोकर इन्हें छांव में सुखाया जाता है। सूखने के बाद इसे बाजार में बेचा जाता है।








