पूरे देशभर में रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के अंतर्गत गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तेज गति से खरीद जारी है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की एक्टिव व्यवस्था के चलते किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है। उत्तर प्रदेश की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद अभियान ने तेज रफ्तार पकड़ ली है जिसका सीधा लाभ अब तक प्रदेश के लाखों किसानों को मिल चुका है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 28 अप्रैल तक कुल 6.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद दर्ज की गई है। खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम अपनाया गया है। पंजीकरण से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है।
1,15,854 किसानों को 1318 करोड़ रुपये का भुगतान
सरकार ने जानकारी दी है कि अभी तक 1,15,854 किसानों को 1318 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से किया जा चुका है। वक्त पर राशि मिलने से किसान बिना किसी परेशानी के अपनी उपज मंडियों में बेच रहे हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता भी कम हुई है।
पूर्वांचल के जिलों ने गेहूं खरीद में किया शानदार प्रदर्शन
पूर्वांचल के जिलों ने इस बार गेहूं खरीद में शानादर प्रदर्शन किया है। देवरिया जिला 55.82 प्रतिशत खरीद के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। इसके अतिरिक्त बस्ती, प्रतापगढ़, बलरामपुर और संतकबीरनगर जैसे जिले भी खरीद में तेजी से आगे बढ़े हैं। इन जिलों में प्रशासनिक सक्रियता और किसानों की भागीदारी साफ नजर आ रही है।
हरियाणा के किसानों को भी फायदा
हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि नई व्यवस्था के अंतर्गत लस्टर लॉस की सीमा 70 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है, जबकि सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा भी बढ़ाई गई है। इससे खराब मौसम से प्रभावित किसानों को अपनी फसल एमएसपी (MSP) पर बेचने में राहत मिली है।
डिजिटल व्यवस्था से किसानों को हुआ फायदा
राज्य सरकारें खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दे रही हैं। ऑनलाइन पंजीकरण, भुगतान और निगरानी व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है। इससे किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है और खरीद केंद्रों पर अनियमितताओं में कमी आई है।









