Litchi Farming: लीची खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है। बाजार में भी इसकी बहुत ज्यादा डिमांड है लेकिन इसकी खेती करना उतना ही मुश्किल काम है। अब लीची के पकने का समय हो रहा है और ऐसे ही वक्त बगीचों में कीटों का आतंक बहुत अधिक बढ़ जाता है। ये कीट फलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे समय में किसानों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं अगर आपके भी लीची के बाग पर कीटों ने हमला कर दिया है तो कैसे बचाव करें।
इस समय लीची की विशेष देखभाल की जरूरत
लीची का फल बनने के इस समय में हल्की सिंचाई, पोषण प्रबंधन और समय पर दवाओं के छिड़काव की बहुत जरूरत होती है। मौसम में जारी उतार-चढ़ाव की वजह से फल झड़ने और कीट प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए पेड़ों की जड़ों में नमी बनाए रखना और जरूरी पोषक तत्व देना फसल को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
इन कीटों का लीची पर ज्यादा खतरा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस वक्त लीची के बागों में तीन तरह के कीटों का खतरा सबसे अधिक होता है। इनमें पहला कीट लीची स्टिंक बग है यह लीची की कोमल पत्तियों और टहनियों से रस चूस कर पौधे को कमजोर कर देता है। इसमें फल काले होकर गिरने लगते हैं। वहीं दूसरा कीट मिली बैग है, यह तनों और मंजरियों पर तेजी से फैलता है और फूल सूखने लगते हैं। वहीं तीसरा किट लीची माइट है, यह पत्तियों के नीचे छिपकर उन्हें नुकसान पहुंचता है जिससे पत्तियां सिकुड़कर सूखने लगती है। वहीं इन कीटों के लगने का असर सीधे लीची के उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है। इन तीनों ही कीटों के अलावा फल बेधक कीट भी लीची के लिए बहुत खतरनाक है। यह फल में छेद कर अंदर से गूदा खराब कर देता है, जिससे फल समय से पहले गिरने लगते है और बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है।
लिएबुप्रोफेजिन या इमिडाक्लोप्रिड का करें छिड़काव
कीटों से बचाने के लिए शुरुआती दौर में बचाव जरूरी है ऐसे में स्टिंक बग और अन्य कीटों के लिएबुप्रोफेजिन या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव किया जा सकता है। वहीं मिली बग से बचाव के लिए बगीचे की सफाई रखें और पेड़ों के तनों पर ग्रीस लगायें। वहीं लीची माइट के लिए सल्फर या दूसरी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।
सिंचाई के साथ-साथ पोषण का रखें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मात्रा कभी ज्यादा तो कभी कम होती है, तो इसका सीधा असर फलों पर पड़ता है और वे फटने लगते हैं। इस समस्या से बचने के लिए ड्रिप सिंचाई सबसे कारगर तरीका माना जा रहा है, जिससे पौधों को लगातार सही मात्रा में पानी मिलता रहता है। इसके अतिरिक्त कैल्शियम और बोरॉन का छिड़काव भी बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ फलों की क्वालिटी बेहतर होती है, बल्कि फल झड़ने की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाती है।








