शहरों में जगह की कमी के बावजूद बागवनी का शौक अब अधूरा नहीं रहेगा। बनाना चीकू जैसे स्वादिष्ट मीठे फलों को उगाने के लिए अब बड़ी जमीन या फिर बगीचे की जरूरत नहीं है। अब इसे टेरिस गार्डनिंग के जरिए आप अपनी छत पर ही चीकू का पौधा लगाकर मीठे फलों का आनंद ले सकते हैं।
टेरिस गार्डनिंग बनी नया ट्रैंड
इन दिनों टेरिस गार्डनिंग ट्रैंड में छाई हुई है क्योंकि इस तकनीक में ना ज्यादा देखभाल की जररूत होती है और ना ही ज्यादा जगह की। आजकल लोग इस ट्रैंड को अपनाकर अपनी छत पर ही सब्जियों से लेकर फलों तक अलग-अलग किस्मों को उगा रहे हैं। खासतौर पर शहरों में यह तकनीक खूब अपनाई जा रही है।
चीकू के लिए बड़े गमले का चयन
अगर आप अपने टेरिस गार्डनिंग में बनाना चीकू का पौधा लगाने चाहते हैं तो आपको बड़े गमले का चयन करना होगा। गमले का साइज 22 से 24 इंच का हो, जिससे उन गमलों में पौधों की जड़े तेजी से फैल सकें और पौधे फल देना जल्दी शुरु कर दें, क्योंकि सही देखभाल के साथ यह पौधा लगभग एक फीट की ऊंचाई पर ही फल देना शुरू कर देता है, जो इसे खास बनाता है।
बनाना चीकू की खासियत
बनाना चीकू की खबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इसका फल सामान्य चीकू की तुलना में केले जैसा लंबा होता है। स्वाद में शहद जैसा मीठा और रसीला होता है साथ ही आप एक पौधे से 4-5 फल पा सकते हैं। इन दिनों यह फल बहुत पसंद किया जा रहा है।
भुरभुरी मिट्टी होना आवश्यक
बनाना चीकू के लिए गमले में भुरभुरी मिट्टी होना बहुत आवश्यक है। साथ ही इसमें 30-40% गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट का पौधों में छिड़काव करना भी बेहद ही आवश्यक है। इसके अलावा आप थोड़ी मात्रा में बालू या धान की भूंसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और इस मिश्रण से मिट्टी में पानी की निकासी सही रहती है और जड़ों को हवा मिलती रहती है।
पानी देने का सही तरीका
बनाना चीकू के पौधे में ना तो कम पानी चाहिए और ना ही बहुत ज्यादा पानी। जब गमले में आपको एक इंच मिट्टी सूखी नजर आए तो समझ जाएं की बनाना चीकू को पानी देना है। यदि आप हर दिन पौधे में पानी देंगे तो पौधे की जड़ सड़ जाएगी।
पौधे में समय-समय पर खली डाले
पौधे को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर खली डालते रहें जिससे पौधों की जड़े मजबूत होती है और फंगस और कीटों का लगने का खतरा कम रहता है और पौधे सुरक्षित रहते हैं।








