Cotton Cultivation Tips: कपास की बुवाई मौसम का मिजाज इस बार बिल्कुल सही बना हुआ है। ये बेहतर शुरुआती के संकेत हैं। यदि किसान भाई सही तकनीक और समय का चुनाव करते हैं तो उत्पादन दोगुना हो सकता है।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कपास की खेती कैसे की जाए जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी हो-
कपास के लिए मई का महीना उपयुक्त- कपास की बुवाई के लिए मई का महीना एकदम सही होता है। इस दौरान तापमान और मिट्टी की नमी पौधे के शुरुआती विकास में बहुत फायदेमंद होती है। साथ ही कीटों के हमले से भी सुरक्षित रहती है।
उन्नत और हाइब्रिड किस्मों को प्राथमिकता- बीजों का चुनाव करते वक्त हमेशा उन्नत और हाइब्रिड किस्मों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना जरूरी है। इससे मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। स्वस्थ बीज ही मजबूत फसल की बुनियाद होता है।
गहरी जुताई का खास ख्याल– खेती की तैयारी करते वक्त गहरी जुताई का खास ख्याल रखना चाहिए जिससे जमीन की जलधारण क्षमता बढ़ सके। कपास की बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी का सही ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर पौधों के बीच सही दूरी होगी तो उन्हें पर्याप्त धूप और हवा मिलेगी। ऐसे में टिड्डियों और अन्य कीटों का प्रकोप काफी कम हो जाएगा।
ड्रिप इरिगेशन तकनीक- ड्रिप इरिगेशन तकनीक यानि की बूंद-बूंद तकनीक कपास की खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस तकनीक से पानी की बचत होने के साथ-साथ खाद और पोषक तत्व पौधे के सही जड़ तक पहुंचते हैं।
मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल- मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल होना चाहिए। कपास को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की सही मात्रा की जरूरत होती है, लेकिन इनका असंतुलित उपयोग फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। समय-समय पर सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने से कपास की गुणवत्ता और चमक दोनों में सुधार होता है।
सुरक्षा के लिए निगरानी जरूरी- फसल की सुरक्षा के लिए शुरूआती निगरानी बहुत जरूरी है। गुलाबी सुंडी जैसे खतरनाक कीटों से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर ही जैविक या रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें।











